
जिले में पिछले चार दिनों से मानसून की गतिविधियां लगभग थम गई हैं। लगातार तेज धूप और वर्षा नहीं होने से खेती-किसानी का काम प्रभावित होने लगा है। खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे धान की बोआई और रोपाई की रफ्तार धीमी पड़ गई है। किसान अब एक बार फिर मानसून के सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो बोए गए धान के अंकुर प्रभावित हो सकते हैं और कई किसानों को दोबारा बोआई करनी पड़ सकती है।
कोरबा जिले की अधिकांश खेती आज भी मानसून पर निर्भर है। सिंचाई सुविधाओं के सीमित होने के कारण किसान वर्षा के भरोसे ही खेती करते हैं। यही वजह है कि बारिश में थोड़ी भी कमी का सीधा असर कृषि कार्यों पर पड़ता है। धान के अंकुरण के लिए लगातार नमी जरूरी होती है, लेकिन तेज धूप और बारिश नहीं होने से खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
जिले में एक जून से अब तक औसतन 277.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक 323.5 मिमी वर्षा हुई थी। इस प्रकार इस वर्ष अब तक लगभग 96 मिमी कम वर्षा होने से कृषि कार्य अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया है। शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने खेतों की जुताई कर सूखा बोआई शुरू कर दी थी, लेकिन लगातार बारिश नहीं होने के कारण अब खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बची है। इसका सबसे अधिक असर धान की खेती पर दिखाई दे रहा है।
फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह:-
मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए कृषि विभाग किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती अपनाने की सलाह दे रहा है। विभाग का कहना है कि धान के साथ-साथ कोदो, रागी, मक्का जैसी फसलें कम पानी में बेहतर उत्पादन दे सकती हैं। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए शासन ने धान के स्थान पर अन्य फसलें लगाने वाले किसानों को 15 हजार रुपये तक की अनुदान राशि देने की घोषणा की है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पानी की बचत भी होगी और मानसून पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
वर्षा एक जून से अब तक (मिलीमीटर में)
तहसील वर्षा
कोरबा 321.2
भैसमा 268.4
करतला 210.3
कटघोरा 322.7
दर्री 341.7







